दुनिया थके न दिन गिन-गिन
ऐसा हो बस यार जन्मदिन।
छुट्टी जैसे आज मनी है
बस ऐसे ही आए हर बार जन्मदिन।
इस ग्रुप में सब शायर हैं
तो रोज़ मने ये त्यौहार जन्मदिन।
पंकज (छैलू) जी हो तूम्हे मुबारक
पहले से बेहतर हो हरबार जन्मदिन।
मुंह मीठा हो आज हम सभी का
आपका है दिलदार, जन्मदिन।।
आपका भाई -कवि-रणवीरसिंह चारण
Kavi Ranveer charan
Sunday, 22 September 2019
जन्म दिन
Saturday, 16 February 2019
पुलवामा के विर शहीदों को मेरा काव्यंजलि
अब जय घोस गूंज उठा है कश्मीरी घाटी में
आतंकी हमला अब नहीं झेल पाएंगे ।
सरकार सेना को अब आदेश दिला
ईंटौ का जवाब पत्थरों से देना हौगा,
अब आदेश दिलादो फिर से धमाल मचाएगे ।
बयालीस के बदले चारसौ बयालीस मार गिराएगे ।
करके एक के ऊपर दूसरा सर्जिकल स्ट्राइक करवाएंगे ।
जहां छुपा होगा आतंकी वही मार गिराएगे ।
कवि रणवीरसिंह चारण
Sunday, 21 October 2018
तुमने क्यौ श्रृंगार से....
ना बिदिया कुमकुम ना पायल ना हाथौ में चुडिया ।
तुमने क्यौ श्रृंगार इतनी से बना रखी है दूरिया ।।
ना जाने किन-किन प्रशनों के उतर खोजा करती हौ ।
अन्तर मन में मन्थन करती क्या- क्या सोचा करती हौ ।
तो बता नही देती क्यौ मुझको क्या है यह मजबूरीया ।।
तुमने क्यौ श्रृंगार से....
रूप का आकर्षण क्षण छण में मन अभिमत्रिंत कर देता था ।
हृदय पतल पर छवि तुम्हारी रेखाकिंत कर देता था ।
मेहगे मोती सी काया पर, काया पर मेहगे मोती सी ।
मेहगे मोती सी काया पर,धाक रखी क्यों सिपिया ।।
तुमने क्यौ श्रृंगार से....
हुआ बदन पर हवन पति तेरा तु कहाँ अभागिन है ।
में मर कर हो गया अमर तौ तू भी सदा सूहागन है ।
तू मुझको चांद समझ लेना तु मिट जाएगी दुरिया ।।
तुमने क्यौ श्रृंगार से....
कवि-रणवीर सिंह चारण
भदौरा, नागौर, राजस्थान
मौ. 9680745147
में भारत माँ का बेटा हूँ
जुबान कड़वी है मगर दिल साफ रखता हूं
सही को सही और गलत को गलत कहने की औकात रखता हूं
दोस्त हो या दुश्मन मेरा मैं सभी के कदमों का इलाज रखता हूं
और मैं अपनी शख्सियत की यह पहचान रखता हूं
आंखों में तिरंगा और दिल में हिंदुस्तान रखता हूं।।
कवि-रणवीर चारण
भदौरा, नागौर, राजस्थान
मौ. 9680745147
Wednesday, 5 September 2018
सुचिता के हत्यारो को
***मूक्तक***
कोमल घास पर चलकर घाव दुसरो को दे जाते है मिष्ठान खाते खुद जहर की पुड़िया हाथ दे जाते है
हया नही आती जालिमो को अपनी हरकत पर
मासूम प्यारी बेटियों का वो बचपन छीन जाते है
*** कविता***
सुचिता के हत्यारो को
ढूंढकर मारो सालो को ,
सर-ए-आम फांसी लटकादो
उन मानवता के गद्दारो को।
अरे ! सुचिता के ....
नोंच नोंच मारा जिसने
नन्ही प्यारी गुड़िया को,
अरे उन कुत्तो को हाथ धरो
तुम उन सैनिक मतवालों को।
अरे ! सुचिता के ...
जिसने कुचला उस बगीया के
नन्हे प्यारे फूल को,
भरे बाजर जिंदा जला दो
उन बलात्कारी हैवानो को।
अरे ! सुचिता के ....
अरे बहुत हो गई माफी-
वाफी इसको अब बन्द करो,
लटकाकर फाँसी इनको
तुम इनके पक्षधरो से द्धंद्ध करो ।
अरे ! सुचिता के ....
कवि-रणवीर सिंह चारण
गांव भदौरा, जिला नागौर, राजस्थान
(हॉल-पिपाड़ शहर जौधपूर)
मौ.9680745147
Monday, 20 August 2018
प्रेम नाम है शिव शंकर
बन्धन और विखण्डन शिव हैं !
अनुबन्धों के चन्दन शिव हैं !!
जनी नयन की भाषा शिव से !
होती दूर निराशा शिव से !!
विश्वासों के अजर अमर का !
प्रेम नाम है शिव शंकर का !!
शिव रहते आँखों के जल में !
शिव हिरदय की उथल पुथल में !!
सबकी किस्मत रचते शम्भू !
मयखानों में बसते शम्भू !!
काम शुद्धता गंगाधर का !
प्रेम नाम है शिव शंकर का !!
कवि-रणवीर सिंह चारण
भदौरा,नागौर,राजस्थान (हॉल-पिपाड़ शहर जौधपूर)
मौ.9680745147