जुबान कड़वी है मगर दिल साफ रखता हूं
सही को सही और गलत को गलत कहने की औकात रखता हूं
दोस्त हो या दुश्मन मेरा मैं सभी के कदमों का इलाज रखता हूं
और मैं अपनी शख्सियत की यह पहचान रखता हूं
आंखों में तिरंगा और दिल में हिंदुस्तान रखता हूं।।
कवि-रणवीर चारण
भदौरा, नागौर, राजस्थान
मौ. 9680745147
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